Dodiya rajput group
जय कुलदेवी हिंगलाज माता जी।
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जय भेरू नाथ।
जय भेरू नाथ।
9950555091के द्वारा 03//10/2016
Dodiya rajput logo👆
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
डोडिया राजपूत ग्रुप के सदस्य राज्य
(1) rajasthan
(2) gujrat
(3) madhyapradesh(m.p)
(4) punjab
Dodiya rajput group admin name
And address
Jashwant singh dodiya
thikana- sardargarh
village- kotela
post - bagol
th. nathdwara
district. rajsamand
state rajasthan
313301
Mobile number
Other admin dodiya group
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Abhay Singh ji dodiya
Th- Nimbodiya Khurd.
Th Nagda Jila Ujjain (Ratlam) (M.p)
Mo. 9993318134
Hanwant Singh ji Dodiya
Thi Narlai sardargarh
Desuri District Pali rajasthan
Mo. 9820503475
Chandra singh ji Dodiya
Bhuj Kachchh
Gujrat
Mo 9054468270
Other admin dodiya group
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Abhay Singh ji dodiya
Th- Nimbodiya Khurd.
Th Nagda Jila Ujjain (Ratlam) (M.p)
Mo. 9993318134
Hanwant Singh ji Dodiya
Thi Narlai sardargarh
Desuri District Pali rajasthan
Mo. 9820503475
Chandra singh ji Dodiya
Bhuj Kachchh
Gujrat
Mo 9054468270
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Dodiya rajput group fhotos
इस ग्रुप मे महत्वपूर्ण ठिकाणो के ठाकुर साहब
व उनके सहयोगी है ।
व सरकारी पद पर आसीन अधिकारी गण
व बिजनेस मेन व स्टुडेंट शामिल है ।
व अन्य नौकरी पेशा मेम्बर शामिल है ।
✴✴✴✴✴✴✴✴✴✴✴✴
Date 16/17-August-2019
Group chat👇👇👇👇👇👇👇👇
➡ठिकाणा सरदारगढ़ (मेवाड़)
के 12th ठाकुर इन्द्रभाणसिंहजी के वंशज इन्द्रभाणोत डोडिया कहलाये ।
➡गड़ गिरनार का राजा अपनी बहन ओर अपने जियोसा ओखम भाठी को राज पाट कुछ समय के लिये देकर तीर्थ यात्रा पर निकल गये थे
राजमहल के एक कमरे मे ताला बन्द नगाड़ा पड़ा था
राजा अपनी बहन से कह गया था की नगाड़ा नही बजाना
यदि विपत्ति आये तो ही बजाना
लेकिन बहन की बात न मानकर जियोसा ओखम भाटी ने बजा दिया
रत्नागिरि सागर आ गये ओर बोले क्या तकलीफ है भाठी जी ने बोला कोई तकलिफ नही है शौक से बजाया
इतना सुनकर सागर ने श्राप दे दिया जो डोडिया भाटी को लड़की देगा वो सुखी नही रहेगी
ओर डोडिया गिरनार नही चडेगा
➡डोडिया राजपूत की शादी डोडिया राजपूत मे नही होती है ।
भाटी राजपूत के साथ मेरे क्षैत्र मे सम्बन्ध नही हे ।
लडंकी दि भी नही ओर लि भी नही ।
डोडिया ओर डोड मे अन्तर कुछ क्षेत्र के डोड की मान्यताये व डोडिया राजपूत की मान्यता मे बहुत अन्तर है ।
डोडिया ओर डोड एक है या नही इसके लिए दो तिन क्षेत्र के बडवा भाभा की पोती को देखना व समझना पडेगा । डोड की वंशावली को देकना पडेगा ।डोडिया की वंशावली से मिलती है या नही ।
मेरे गांव कोटेला के सम्बन्ध
बेन बेटियो का लेनदेन ।
बेन बेटी दि जाती है 👇
(1)चौहान
(2)झाला
(3)देवगढ वाले चुन्डावत व अन्य कुछ
(4)राणावत के गुढा वाले राणावत व कुछ अन्य
(5)राठौड़
इत्यादी
(6)शक्तावत
(7)सारंगदेवोत
👇लि जाती है ।
(1)झाला
(2)शक्तावत
(3)मोजावत
(4)चोहान
(5)सलखावत
(6)चुन्डावत
(7)राणावत
(8)सोलंकी
(9)कितावत
(10)राठौड़
इत्यादी,,,,,,,,
इनमे भी सम्बन्ध करने से पहले उनका परिवार किस मे बेहन बेटि देते है यह देखने के बाद ही सम्बन्ध करते है ।
➡भानपुर m.p मे आशावत डोडिया नाम उपयोग होता है ।
Lodh ,asawati m.p मे मेसावत डोडिया उपयोग किया जाता है ।
Tal /mandaval ke pas k gav he
➡ठिकाना ,लोध /रूपडी/भानपुर/मुंडलाकला/उनी/नाकटवाडा/ताल/मंदावल/आर्जला/ खजुरिया/हेपटखेडा
ठि. खारवाकला
सभी डोडिया राजपूत ठिकाने व गांव है।
Inme..thikane me ...mandaval/tal /mundlakla gina jata he. Baki sab gav he
Tal se 15 km ka area ...adhikansh dodiya rajput he...
kuch nagda ke aas pas he ...
➡Tal vale
gangavat dodiya
गंगासिह जी के वंशज
Or mandaval vale purawat dodiya
पुरसिंह जी के वंशज
➡कुछ संकेत बताते एक है ।
कुछ संकेत बताते अलग है यह वंशावली व डोड का इतिहास है उस से ही मालूम होगा ।
मे प्रयास कर रहा वास्तविक जानने की ।
अभी तक मेने कन्फर्म नही किया है अलग है या एक है ।
कुछ प्रमाण के आधार पर ही कह सकते है ।
➡मेरा उद्देश्य किसी भी राजपूत का अपमान करना नही है ।
मेरा यही उद्देश्य है की हमारा जो इतिहास जो कुछ स्वार्थी लो गो ने दबा दिया है उसे वापिस समजु व अपने समाज के सामने पस्तुत करू ।
डोडिया समाज मे भर्म बहुत फैलाया गया है ।
आप का साथ बना रहै हुक्म
➡बात करते समय मुझ से कोई गलत शब्द युज हो गया हो तो माफ करना ।
कुछ अन्य राजपूत है तो क्या हुआ मेरे लिए यही काफी है आप मेरे राजपूत भाई है लेकिन अपने कुल के बारे मे जानकारी रखना आवश्यक है बाकी तो विवाह जैसे प्रोग्राम मे लोग निचा दिखाने का प्रयास करते है ।
एक जगह ऐसा ही हुआ मे गया शादी मै जिस समय मुझे डोडिया समाज के बारे मे जानकारी नही थी व जानकारी नेट पर भी नही थी ।
उस समय कुछ अन्य राजपूत ने कुछ श्लोक बोलकर डोडिया समाज को निचा दिखाने का प्रयास किया ।
उसी दिन मेने ढान ली डोडिया की जो भी जानकारी है वह सब ऑनलाइन करूंगा व अपने डोडिया राजपूत को अपने समाज की गोरव शाली इतीहास को बताउंगा । व अपने हर क्षेत्र के डोडिया को एक करूंगा ।
आज बो उद्देश्य लगभग सफल रहा ।
➡सही कहा आपने हुक्म अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करके ऑनलाईन करने का कार्य आपने कीया
डॉडिया राजपूत की एक नई पहचान बनाई
धन्यवाद करता हूं आपके प्रयास को
विवाह मे निचा दिखाने का प्रयास करने वाले आज के टाईम खुद डोडिया समाज का इतिहास बता रहै है दूसरो को ।
उनको मालूम हो गया एक महिने के अन्दर अंदर डोडिया राजपुत का गौरवशाली इतिहास
डोडिया राजपूत प्राचिन महान शासक वंशावली है ।
➡सभी बन्ना हुकुम को जय माताजी राजपूतों में डोडिया गोत्र में कहीं के भी डोडिया हो बहस नहीं करना चाहिए एकता की बात करना चाहिए कहीं डोडिया भी लिखते हैं कहीं डोड भी लिखते हैं यह क्षेत्र की भाषा का प्रभाव रहता है हमें अपने गोत्र में एकता दिखानी हैं जैसे जसवंत सिंह कोटेला राजसमंद वाले कर रहे हैं कभी डोडिया गोत्र वालों में मीन मेख नहीं निकालना चाहिए इसी मीन मेक के कारण राजपूतों के देश को 1000 वर्ष गुलाम रखा राजपूतों में एकता आज के समय की जरूरत है जय माताजी कुंवर जगपाल सिंह डोडिया
ठिकाणा चांपानेर
गागरोन किला
▶▶▶▶▶▶▶▶▶▶▶▶▶▶▶▶▶▶
यह केवल ग्रुप चेट है डोडिया राजपुत की जिसमे कुछ खास लाइन है उनको यहा पर दर्शाया गया है । अभी तक प्रमाणित नही किया है किसी भी जानकारी को ।
હરતાં ફરતાં🚶🏻🚶🏻 ગાંધીનગર
વીર રણસિંહજી ડોડિયા (પ્રભાસપાટણ)
वीर रणसिंहजी डोडिया (प्रभास पाटन)
તા૧૭-૮-૨૦૧૯ શનિવાર
⚜👳🏻 ધડ ધીંગાણે ને માથું માંના મંદિરે ⚜👳🏻
🐎⚔🚩રણસિંહજી ડોડિયા 🐎⚔🚩
જનની જણ તો ભક્ત જણ જે કાં દાતા કાં શૂર,
નહિંતર રે’જે વાંઝણી મત ગૂમાવીશ નૂર.
સોરઠની સુહાની ધરતી અનેક સોના રૂપા જેવી પાંખો સંઘરીને બેઠું છે.એ માંહેની વિક્રમ સવંત ૧૩૦૨ મા પવિત્ર પ્રભાસ પાટણની ભૂમિ માં બનેલી ઘટનાની આ વાત છે પ્રભાસપાટણ માં સોમનાથ મંદિરથી થોડા અંતરે એક પૌરાણિક વાવ આવેલી છે.વાવ ના પિસ્તાલીસ માં પગથિયે બેસીને એક પુરુષ માં ખોળિયાર ની સ્તુતિ કરી રહ્યો છે.
એવા ટાણે પાટણના એક વાણિયા ની દિકરી ના લગ્ન વિધિ ચાલી રહી છે.હજુ તો પહેલા મંગળનુ પહેલું પગલું ઉપડે અને ભાઈ જવતલ નો ખોબો ભરે બરાબર એ ટાણે રિડિયા રમણ થઈ અચાનક લૂંટારુ ટોળકીએ લગ્ન મંડપ પર ત્રાટકે છે.વિધર્મીઓના ટોળાએ જેમ બાજ ચકલીનો માળો વીખે એમ પ્રસંગને પીખવા લાગ્યા.ભાઈના હાથમાં જવતલ અને પોતાના હાથમાં મહેંદી જોતી આ કન્યા અચાનક ગોકીરો થતાં એવી તો હેબતાઈ ગઈ અને તેની તીણી ચીસ પાટણના આકાશ ચિરતી થોડે છેટે પવિત્ર વાવમાં સાધના રત રણસિંહજી ડોડિયા ના કાનમાં વીજળી ની જેમ સળાવો લઈ ગઈ.જોતજોતામા માંડવળી રણસિંહજી દાદા પાસે આવીને આવી પડેલી.આફતથી દાદાને અવગત કરતાં ગભરાતા સ્વરે કીધું." બાપુ બાપુ કોઈ કન્યાને ઉપાડી જાય છે.તમે હાલો બાકી અનર્થ થઈ જશે. રણુભા આખી વાત સમજી જાય છે.તેમના રોમે રોમ ખડા થઈ જાય છે.
રણસિંહજી સંત સ્થિતિમાથી શૌર્યવાન વીર સ્વરૂપમાં બદલાઈ જાય છે.માને આરાધે છે હે મા તું તો જગત જનની અને સૌના રખોપા કરજો માં રણસિંહજી દાદા પોતાના હાથમાં તલવાર
લે છે અને યુધ્ધમાં જતાં પહેલાં જ પોતાનું મસ્તક તલવાર થી જુદું કરીને માં ના ચરણોમા મૂકે છે.અને ધડ લડવા માટે નીકળે છે.તેમના બંને હાથમાં તલવાર છે અને ઝાંકા ઝીંક ઝાંકાઝીક બોલાવતું દાદા નું ધડ દુશ્મનોના માથાં ધડાધડ જુદા કરે છે.યવન ટોળકીમાં ભય ફફડાટનું વાતાવરણ ફેલાઈ જાય છે.ધડ જે રીતે દુશ્મનોને રહેંસી રહ્યું છે તે જોતાં એવું લાગે છે કે સાક્ષાત માં ખોડલ રાક્ષસો નો સંહાર કરી રહ્યા છે.લોકો રણસિંહજી દાદામા દિવ્ય શક્તિ ના દર્શન કરી રહ્યા છે.થોડી જ વારમાં તેઓ યવન લૂંટારુઓને હતા નહોતા કરી નાખે છે.યવન ટોળકીનો કચ્ચરઘાણ વળી સાનખતાળ ના ટીબે
શાંત પડે છે. દુશ્મનોનો સફાયો થાય છે.દિકરીને આ બધું જોયા પછી સંસાર માંથી રસ ઉડી જાય છે.રણસિંહજી દાદા ની વીરતા, બહાદુરી ને દિવ્યતાથી પ્રભાવિત થઈ તેણે પણ સતી થવાનો નિર્ણય કર્યો છે. રણસિંહજી દાદાના આ બલિદાન ને કાયમ કરતી આ દિકરી ચોરીમાં થાપો દઈ સતી થાય છે.હાલમા પણ રણસિંહજી દાદા અને ખોડીયાર માં જે વાવમાં બિરાજમાન છે.તે વાવને કાંઠે લિબડાના ઝાડ નીચે સતીમા ની ડેરી છે.જે રણસિંહજી દાદા ના સમર્પણ અને શૌર્યની સાક્ષી પૂરે છે.લોકો માં ખોડલ અને તેના દિવ્ય પુત્ર સમાન રણસિંહજી દાદાના દર્શન કરવા આવે છે.અને સિંદુર ચડાવે છે.લોકો દાદાની સાથે સાથે સતીમા ને પણ પુજે
છે.રણસિંહજી ડોડિયા ની કમળ પૂજા સોમનાથ ની રક્ષા માટે વિજયપાલસિંહજી ડોડિયાએ કરેલા કેસરીયાની યાદ અપાવી જાય છે.
આ જગ્યા પ્રભાસપાટણ થી સોમનાથ મંદિર જવાના મુખ્ય માર્ગને જમણી બાજુએ બિલિવન આવે છે.તેમા આ ખાંભીઓ આવેલી છે.
🙏🏻🌸 માહિતી🙏🏻🌸
સંદિપસિંહ ડોડિયા સોખડા
✍🏻લિ: વિષ્ણુસિંહ ચાવડા પેથાપુર✍🏻
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इस ग्रुप मे महत्वपूर्ण ठिकाणो के ठाकुर साहब
व उनके सहयोगी है ।
व सरकारी पद पर आसीन अधिकारी गण
व बिजनेस मेन व स्टुडेंट शामिल है ।
व अन्य नौकरी पेशा मेम्बर शामिल है ।
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Date 16/17-August-2019
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➡ठिकाणा सरदारगढ़ (मेवाड़)
के 12th ठाकुर इन्द्रभाणसिंहजी के वंशज इन्द्रभाणोत डोडिया कहलाये ।
➡गड़ गिरनार का राजा अपनी बहन ओर अपने जियोसा ओखम भाठी को राज पाट कुछ समय के लिये देकर तीर्थ यात्रा पर निकल गये थे
राजमहल के एक कमरे मे ताला बन्द नगाड़ा पड़ा था
राजा अपनी बहन से कह गया था की नगाड़ा नही बजाना
यदि विपत्ति आये तो ही बजाना
लेकिन बहन की बात न मानकर जियोसा ओखम भाटी ने बजा दिया
रत्नागिरि सागर आ गये ओर बोले क्या तकलीफ है भाठी जी ने बोला कोई तकलिफ नही है शौक से बजाया
इतना सुनकर सागर ने श्राप दे दिया जो डोडिया भाटी को लड़की देगा वो सुखी नही रहेगी
ओर डोडिया गिरनार नही चडेगा
➡डोडिया राजपूत की शादी डोडिया राजपूत मे नही होती है ।
भाटी राजपूत के साथ मेरे क्षैत्र मे सम्बन्ध नही हे ।
लडंकी दि भी नही ओर लि भी नही ।
डोडिया ओर डोड मे अन्तर कुछ क्षेत्र के डोड की मान्यताये व डोडिया राजपूत की मान्यता मे बहुत अन्तर है ।
डोडिया ओर डोड एक है या नही इसके लिए दो तिन क्षेत्र के बडवा भाभा की पोती को देखना व समझना पडेगा । डोड की वंशावली को देकना पडेगा ।डोडिया की वंशावली से मिलती है या नही ।
मेरे गांव कोटेला के सम्बन्ध
बेन बेटियो का लेनदेन ।
बेन बेटी दि जाती है 👇
(1)चौहान
(2)झाला
(3)देवगढ वाले चुन्डावत व अन्य कुछ
(4)राणावत के गुढा वाले राणावत व कुछ अन्य
(5)राठौड़
इत्यादी
(6)शक्तावत
(7)सारंगदेवोत
👇लि जाती है ।
(1)झाला
(2)शक्तावत
(3)मोजावत
(4)चोहान
(5)सलखावत
(6)चुन्डावत
(7)राणावत
(8)सोलंकी
(9)कितावत
(10)राठौड़
इत्यादी,,,,,,,,
इनमे भी सम्बन्ध करने से पहले उनका परिवार किस मे बेहन बेटि देते है यह देखने के बाद ही सम्बन्ध करते है ।
➡भानपुर m.p मे आशावत डोडिया नाम उपयोग होता है ।
Lodh ,asawati m.p मे मेसावत डोडिया उपयोग किया जाता है ।
Tal /mandaval ke pas k gav he
➡ठिकाना ,लोध /रूपडी/भानपुर/मुंडलाकला/उनी/नाकटवाडा/ताल/मंदावल/आर्जला/ खजुरिया/हेपटखेडा
ठि. खारवाकला
सभी डोडिया राजपूत ठिकाने व गांव है।
Inme..thikane me ...mandaval/tal /mundlakla gina jata he. Baki sab gav he
Tal se 15 km ka area ...adhikansh dodiya rajput he...
kuch nagda ke aas pas he ...
➡Tal vale
gangavat dodiya
गंगासिह जी के वंशज
Or mandaval vale purawat dodiya
पुरसिंह जी के वंशज
➡कुछ संकेत बताते एक है ।
कुछ संकेत बताते अलग है यह वंशावली व डोड का इतिहास है उस से ही मालूम होगा ।
मे प्रयास कर रहा वास्तविक जानने की ।
अभी तक मेने कन्फर्म नही किया है अलग है या एक है ।
कुछ प्रमाण के आधार पर ही कह सकते है ।
➡मेरा उद्देश्य किसी भी राजपूत का अपमान करना नही है ।
मेरा यही उद्देश्य है की हमारा जो इतिहास जो कुछ स्वार्थी लो गो ने दबा दिया है उसे वापिस समजु व अपने समाज के सामने पस्तुत करू ।
डोडिया समाज मे भर्म बहुत फैलाया गया है ।
आप का साथ बना रहै हुक्म
➡बात करते समय मुझ से कोई गलत शब्द युज हो गया हो तो माफ करना ।
कुछ अन्य राजपूत है तो क्या हुआ मेरे लिए यही काफी है आप मेरे राजपूत भाई है लेकिन अपने कुल के बारे मे जानकारी रखना आवश्यक है बाकी तो विवाह जैसे प्रोग्राम मे लोग निचा दिखाने का प्रयास करते है ।
एक जगह ऐसा ही हुआ मे गया शादी मै जिस समय मुझे डोडिया समाज के बारे मे जानकारी नही थी व जानकारी नेट पर भी नही थी ।
उस समय कुछ अन्य राजपूत ने कुछ श्लोक बोलकर डोडिया समाज को निचा दिखाने का प्रयास किया ।
उसी दिन मेने ढान ली डोडिया की जो भी जानकारी है वह सब ऑनलाइन करूंगा व अपने डोडिया राजपूत को अपने समाज की गोरव शाली इतीहास को बताउंगा । व अपने हर क्षेत्र के डोडिया को एक करूंगा ।
आज बो उद्देश्य लगभग सफल रहा ।
➡सही कहा आपने हुक्म अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करके ऑनलाईन करने का कार्य आपने कीया
डॉडिया राजपूत की एक नई पहचान बनाई
धन्यवाद करता हूं आपके प्रयास को
विवाह मे निचा दिखाने का प्रयास करने वाले आज के टाईम खुद डोडिया समाज का इतिहास बता रहै है दूसरो को ।
उनको मालूम हो गया एक महिने के अन्दर अंदर डोडिया राजपुत का गौरवशाली इतिहास
डोडिया राजपूत प्राचिन महान शासक वंशावली है ।
➡सभी बन्ना हुकुम को जय माताजी राजपूतों में डोडिया गोत्र में कहीं के भी डोडिया हो बहस नहीं करना चाहिए एकता की बात करना चाहिए कहीं डोडिया भी लिखते हैं कहीं डोड भी लिखते हैं यह क्षेत्र की भाषा का प्रभाव रहता है हमें अपने गोत्र में एकता दिखानी हैं जैसे जसवंत सिंह कोटेला राजसमंद वाले कर रहे हैं कभी डोडिया गोत्र वालों में मीन मेख नहीं निकालना चाहिए इसी मीन मेक के कारण राजपूतों के देश को 1000 वर्ष गुलाम रखा राजपूतों में एकता आज के समय की जरूरत है जय माताजी कुंवर जगपाल सिंह डोडिया
ठिकाणा चांपानेर
ठिकाणा चांपानेर
गागरोन किला
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यह केवल ग्रुप चेट है डोडिया राजपुत की जिसमे कुछ खास लाइन है उनको यहा पर दर्शाया गया है । अभी तक प्रमाणित नही किया है किसी भी जानकारी को ।
હરતાં ફરતાં🚶🏻🚶🏻 ગાંધીનગર
વીર રણસિંહજી ડોડિયા (પ્રભાસપાટણ)
वीर रणसिंहजी डोडिया (प्रभास पाटन)
તા૧૭-૮-૨૦૧૯ શનિવાર
⚜👳🏻 ધડ ધીંગાણે ને માથું માંના મંદિરે ⚜👳🏻
🐎⚔🚩રણસિંહજી ડોડિયા 🐎⚔🚩
જનની જણ તો ભક્ત જણ જે કાં દાતા કાં શૂર,
નહિંતર રે’જે વાંઝણી મત ગૂમાવીશ નૂર.
સોરઠની સુહાની ધરતી અનેક સોના રૂપા જેવી પાંખો સંઘરીને બેઠું છે.એ માંહેની વિક્રમ સવંત ૧૩૦૨ મા પવિત્ર પ્રભાસ પાટણની ભૂમિ માં બનેલી ઘટનાની આ વાત છે પ્રભાસપાટણ માં સોમનાથ મંદિરથી થોડા અંતરે એક પૌરાણિક વાવ આવેલી છે.વાવ ના પિસ્તાલીસ માં પગથિયે બેસીને એક પુરુષ માં ખોળિયાર ની સ્તુતિ કરી રહ્યો છે.
એવા ટાણે પાટણના એક વાણિયા ની દિકરી ના લગ્ન વિધિ ચાલી રહી છે.હજુ તો પહેલા મંગળનુ પહેલું પગલું ઉપડે અને ભાઈ જવતલ નો ખોબો ભરે બરાબર એ ટાણે રિડિયા રમણ થઈ અચાનક લૂંટારુ ટોળકીએ લગ્ન મંડપ પર ત્રાટકે છે.વિધર્મીઓના ટોળાએ જેમ બાજ ચકલીનો માળો વીખે એમ પ્રસંગને પીખવા લાગ્યા.ભાઈના હાથમાં જવતલ અને પોતાના હાથમાં મહેંદી જોતી આ કન્યા અચાનક ગોકીરો થતાં એવી તો હેબતાઈ ગઈ અને તેની તીણી ચીસ પાટણના આકાશ ચિરતી થોડે છેટે પવિત્ર વાવમાં સાધના રત રણસિંહજી ડોડિયા ના કાનમાં વીજળી ની જેમ સળાવો લઈ ગઈ.જોતજોતામા માંડવળી રણસિંહજી દાદા પાસે આવીને આવી પડેલી.આફતથી દાદાને અવગત કરતાં ગભરાતા સ્વરે કીધું." બાપુ બાપુ કોઈ કન્યાને ઉપાડી જાય છે.તમે હાલો બાકી અનર્થ થઈ જશે. રણુભા આખી વાત સમજી જાય છે.તેમના રોમે રોમ ખડા થઈ જાય છે.
રણસિંહજી સંત સ્થિતિમાથી શૌર્યવાન વીર સ્વરૂપમાં બદલાઈ જાય છે.માને આરાધે છે હે મા તું તો જગત જનની અને સૌના રખોપા કરજો માં રણસિંહજી દાદા પોતાના હાથમાં તલવાર
લે છે અને યુધ્ધમાં જતાં પહેલાં જ પોતાનું મસ્તક તલવાર થી જુદું કરીને માં ના ચરણોમા મૂકે છે.અને ધડ લડવા માટે નીકળે છે.તેમના બંને હાથમાં તલવાર છે અને ઝાંકા ઝીંક ઝાંકાઝીક બોલાવતું દાદા નું ધડ દુશ્મનોના માથાં ધડાધડ જુદા કરે છે.યવન ટોળકીમાં ભય ફફડાટનું વાતાવરણ ફેલાઈ જાય છે.ધડ જે રીતે દુશ્મનોને રહેંસી રહ્યું છે તે જોતાં એવું લાગે છે કે સાક્ષાત માં ખોડલ રાક્ષસો નો સંહાર કરી રહ્યા છે.લોકો રણસિંહજી દાદામા દિવ્ય શક્તિ ના દર્શન કરી રહ્યા છે.થોડી જ વારમાં તેઓ યવન લૂંટારુઓને હતા નહોતા કરી નાખે છે.યવન ટોળકીનો કચ્ચરઘાણ વળી સાનખતાળ ના ટીબે
શાંત પડે છે. દુશ્મનોનો સફાયો થાય છે.દિકરીને આ બધું જોયા પછી સંસાર માંથી રસ ઉડી જાય છે.રણસિંહજી દાદા ની વીરતા, બહાદુરી ને દિવ્યતાથી પ્રભાવિત થઈ તેણે પણ સતી થવાનો નિર્ણય કર્યો છે. રણસિંહજી દાદાના આ બલિદાન ને કાયમ કરતી આ દિકરી ચોરીમાં થાપો દઈ સતી થાય છે.હાલમા પણ રણસિંહજી દાદા અને ખોડીયાર માં જે વાવમાં બિરાજમાન છે.તે વાવને કાંઠે લિબડાના ઝાડ નીચે સતીમા ની ડેરી છે.જે રણસિંહજી દાદા ના સમર્પણ અને શૌર્યની સાક્ષી પૂરે છે.લોકો માં ખોડલ અને તેના દિવ્ય પુત્ર સમાન રણસિંહજી દાદાના દર્શન કરવા આવે છે.અને સિંદુર ચડાવે છે.લોકો દાદાની સાથે સાથે સતીમા ને પણ પુજે
છે.રણસિંહજી ડોડિયા ની કમળ પૂજા સોમનાથ ની રક્ષા માટે વિજયપાલસિંહજી ડોડિયાએ કરેલા કેસરીયાની યાદ અપાવી જાય છે.
આ જગ્યા પ્રભાસપાટણ થી સોમનાથ મંદિર જવાના મુખ્ય માર્ગને જમણી બાજુએ બિલિવન આવે છે.તેમા આ ખાંભીઓ આવેલી છે.
🙏🏻🌸 માહિતી🙏🏻🌸
સંદિપસિંહ ડોડિયા સોખડા
✍🏻લિ: વિષ્ણુસિંહ ચાવડા પેથાપુર✍🏻
जसवंत सिंह बन्ना साहब खम्मा घणी जय माता दी नवरात्रि की बहुत-बहुत शुभकामनाएं आपको पूरे ग्रुप में विराजमान हमारे राजपूत बन्ना हुकुम खम्मा घणी सुमंगल सुप्रभात बापू साहब जसवंत सिंह जी डोडिया मध्यप्रदेश में घटिया वा आष्टा जिला सीहोर डोडिया ओके भैरव शक्ति राजस्थान से आने के बाद जो पड़ाव हुआ था उस गांव का नाम है टांडा
मुझे इन गाँव कि जानकारी है यहा यहा पर
डोडिया परिवार निवास करते हैं मध्य प्रदेश मे बाकी बची जानकारी आप भेजे जो आपके पास हो
हमारे कुल देवता भेरू महाराज
नागदा से जावरा रोड फर्ना जी के पास निम्बोदिया
एवं कुल देवी गाव मोकडी मे
निम्बोदिया से बेरछा रोड पर
ये हमारे गाव
ताल
मण्डावल
खडी डोडिया
जैथल टैक (घट्टिया)
कठोडिया (बदनावर)
सुराखेडी (बडनगर)
पिपलोदा
हासामपुरा(उज्जैन दक्षिण)
मताना (उज्जैन दक्षिण)
सेम्लिया (उज्जैन दक्षिण)
अम्बोदिया डेम
देवलाबिहार (शाजापुर)
कुण्डला (खाचरोद)
घट्टिया (उज्जैन)
चापानेर
कठोडिया बडा (बदनावर)
रतनपुरा (बदनावर)
कलसाडा (बदनावर)
सुखेडा
चन्दावता मुण्डला कला
कुँवर कुलदीप सिंह डोडिया
ठि. सुराखेडी (बड़नगर)
मो, 8435258953
9575726910
डोडिया परिवार निवास करते हैं मध्य प्रदेश मे बाकी बची जानकारी आप भेजे जो आपके पास हो
हमारे कुल देवता भेरू महाराज
नागदा से जावरा रोड फर्ना जी के पास निम्बोदिया
एवं कुल देवी गाव मोकडी मे
निम्बोदिया से बेरछा रोड पर
ये हमारे गाव
ताल
मण्डावल
खडी डोडिया
जैथल टैक (घट्टिया)
कठोडिया (बदनावर)
सुराखेडी (बडनगर)
पिपलोदा
हासामपुरा(उज्जैन दक्षिण)
मताना (उज्जैन दक्षिण)
सेम्लिया (उज्जैन दक्षिण)
अम्बोदिया डेम
देवलाबिहार (शाजापुर)
कुण्डला (खाचरोद)
घट्टिया (उज्जैन)
चापानेर
कठोडिया बडा (बदनावर)
रतनपुरा (बदनावर)
कलसाडा (बदनावर)
सुखेडा
चन्दावता मुण्डला कला
कुँवर कुलदीप सिंह डोडिया
ठि. सुराखेडी (बड़नगर)
मो, 8435258953
9575726910
डोड़ियो के ठिकाणे राजस्थान मै
आपकी जानकारी अपेक्षित है।
लावासरदारगढ़ ठिकाणा
कुँवारिया (इंद्रगढ)
नारलाई मारवाड
जालोडा जोधपुर
डोड़ियाली अजमेर
पीपली डोडियान
मालीखेड़ा
नरदास का गुड़ा
डोडियाें का खेड़ा
जेतारण
लोर
सादुल
सापोल
बागोल
कोटेला
ढिल्ली
टोकराँ
ढीकाणी
लेसवा
सोडास
कंथारिया
कामलोज
रठाना
झांतला
आेडूंद
आटूण
हंमीरगढ़
सियाड़
देलवाड़ीया
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लावासरदारगढ़ ठिकाणा
कुँवारिया (इंद्रगढ)
नारलाई मारवाड
जालोडा जोधपुर
डोड़ियाली अजमेर
पीपली डोडियान
मालीखेड़ा
नरदास का गुड़ा
डोडियाें का खेड़ा
जेतारण
लोर
सादुल
सापोल
बागोल
कोटेला
ढिल्ली
टोकराँ
ढीकाणी
लेसवा
सोडास
कंथारिया
कामलोज
रठाना
झांतला
आेडूंद
आटूण
हंमीरगढ़
सियाड़
देलवाड़ीया
जैतारण
भेजने वाले हनवंत सिंह डोडिया
ठिकाणा नारलाई पाली मारवाड
*"त्रण झाला त्रण पुरबिया (चौहान),*
*चूंडावत भड चार |*
*दोय शक्ता, दो राठौड़,*
*सारंगदेव न पंवार ||"*
मेवाड़ के प्रथम श्रेणी सामंतों के ठिकाने - 16 उमराव
ये ठिकाने हैं ।
1) बड़ी सादड़ी (झाला)
2) देलवाड़ा (झाला)
3) गोगुन्दा (झाला)
4) बेदला (चौहान)
5) पारसोली (चौहान)
6) कोठारिया (चौहन
7) सलूम्बर (चुण्डावत)
8) आमेट (चुण्डावत)
9) देवगढ़ (चुण्डावत)
10) बेगूं (चुण्डावत)
11) भीण्डर (शक्तावत)
12) बान्सी (शक्तावत)
13) बदनोर (राठौड़)
14) घाणेराव (राठौड़)
15) कानोड़ (सारंगदेवोत)
16) बीजोलिया (पंवार)
*अन्य 5 ठिकाने जो बाद में जोड़े गए*
17) भैंसरोड़गढ़ (चुण्डावत)
18) कुराबड़ (चुण्डावत)
19) आसींद (चुण्डावत)
20) मेजा (चुण्डावत)
21) सरदारगढ़ (डोडिया)*मेवाड़ के सामंत*
महाराणा अमरसिंह द्वितीय ने मेवाड़ के सामंतों की 3 श्रेणियां बनाई थीं ।
*प्रथम श्रेणी*
महाराणा अमरसिंह द्वितीय के समय 16 ठिकानों के सामंतों को प्रथम श्रेणी में रखा गया, महाराणा के देहांत के बाद भैंसरोड़, कुराबड़, मेजा, आसींद व सरदारगढ़ ठिकानों के जुड़ने से ये संख्या बढ़कर 21 हो गई थी, लेकिन दरबार में प्रथम श्रेणी में बैठक हमेशा 16 ही रही | मतलब ये कि नए बनाए गए सामंतों को प्रथम श्रेणी में बैठने का अधिकार तभी मिलता जब 16 सामंतों में से कोई अनुपस्थित हो | इन 16 सरदारों को 'उमराव' कहा गया |
*"त्रण झाला त्रण पुरबिया (चौहान),*
*चूंडावत भड चार |*
*दोय शक्ता, दो राठौड़,*
*सारंगदेव न पंवार ||"*
5 नये ठिकाणो के जुड़ने के बाद ये कहा गया
*दो राजा त्रैण राजवी चुण्डा फेरो चार*
*जमादार सुल्तान है डोडीया गढ सरदार*
मेवाड़ के प्रथम श्रेणी सामंतों के ठिकाने - 16 उमराव
ये ठिकाने हैं ।
1) बड़ी सादड़ी (झाला)
काठियावाड़ में हलवद के राजसिंह जी के पुत्र अज्जा के वंशज | अज्जा झाला को यह जागीर महाराणा रायमल ने दी |
2) देलवाड़ा (झाला)
काठियावाड़ में हलवद के राजसिंह जी के पुत्र सज्जा के वंशज | सज्जा झाला को यह जागीर महाराणा रायमल ने दी |
3) गोगुन्दा (झाला)
यह जागीर महाराणा अमरसिंह प्रथम ने शत्रुसाल झाला के छोटे पुत्र कान्हसिंह को दी थी ।
4) बेदला (चौहान)
सम्राट पृथ्वीराज चौहान के वंशधर चंद्रभान चौहान के वंशज
5) पारसोली (चौहान)
बेदला के स्वामी रामचंद्र चौहान के छोटे पुत्र केसरीसिंह के वंशज | केसरीसिंह को यह जागीर महाराणा राजसिंह से मिली |
6) कोठारिया (चौहान)
रणथम्भौर के अंतिम चौहान राजा हम्मीर के वंशधर माणिकचंद चौहान के वंशज
7) सलूम्बर (चुण्डावत)
महाराणा लाखा के ज्येष्ठ पुत्र रावत चुण्डा के वंशज
8) आमेट (चुण्डावत)
रावत चुण्डा के प्रपौत्र जग्गा चुण्डावत के वंशज।
9) देवगढ़ (चुण्डावत)
रावत चुण्डा के प्रपौत्र सांगा चुण्डावत के वंशज।
10) बेगूं (चुण्डावत)
सलूम्बर रावत साईंदास चुण्डावत के भाई खेंगार के पुत्र गोविंददास के वंशज।
11) भीण्डर (शक्तावत)
महाराणा उदयसिंह के दूसरे पुत्र महाराज शक्तिसिंह के ज्येष्ठ पुत्र भाण को यह जागीर महाराणा प्रताप से मिली |
12) बान्सी (शक्तावत)
महाराज शक्तिसिंह के पुत्र रावत अचलदास के वंशज | रावत अचलदास को यह जागीर महाराणा प्रताप से मिली |
13) बदनोर (राठौड़)
मेड़ता के वीर योद्धा जयमल राठौड़ के वंशज | जयमल राठौड़ को यह जागीर महाराणा उदयसिंह से मिली |
14) घाणेराव (राठौड़)
मेड़ता के राव वीरमदेव के पुत्र व जयमल राठौड़ के भाई ठाकुर प्रताप सिंह के वंशज
15) कानोड़ (सारंगदेवोत)
महाराणा लाखा के पुत्र अज्जा के बेटे सारंगदेव के वंशज | सारंगदेव को यह जागीर महाराणा रायमल ने दी |
16) बीजोलिया (पंवार)
मालवा के परमार वंश से निकले हुए अशोक पंवार के वंशज
*अन्य 5 ठिकाने जो बाद में जोड़े गए*
17) भैंसरोड़गढ़ (चुण्डावत)
सलूम्बर के रावत केसरीसिंह चुण्डावत प्रथम के वंशज
18) कुराबड़ (चुण्डावत)
सलूम्बर के रावत केसरीसिंह चुण्डावत प्रथम के तीसरे पुत्र अर्जुनसिंह के वंशज
19) आसींद (चुण्डावत)
कुराबड़ के रावत अर्जुनसिंह के चौथे पुत्र ठाकुर अजीतसिंह के वंशज
20) मेजा (चुण्डावत)
आमेट के रावत माधवसिंह के चौथे पुत्र हरिसिंह के छठे वंशधर बेमाली वाले जालिमसिंह के वंशज
21) सरदारगढ़ (डोडिया)
काठियावाड़ में स्थित शार्दूलगढ़ के सिंह डोडिया के पुत्र धवल के वंशज
*द्वितीय श्रेणी के मेवाड़ 32 ठिकाणे*
1) हमीरगढ़ (राणावत)
महाराणा उदयसिंह के पुत्र वीरमदेव के वंशज
2) चावण्ड (चुण्डावत)
सलूम्बर के रावत कुबेरसिंह चुण्डावत के 5वें पुत्र अभयसिंह के वंशज।
3) भदेसर (चुण्डावत)
सलूम्बर के रावत भीमसिंह चुण्डावत के दूसरे पुत्र भैरवसिंह के वंशज
4) बोहेड़ा (शक्तावत)
भीण्डर के महाराज मोहकम सिंह द्वितीय के दूसरे पुत्र फतहसिंह के वंशज
5) भूंणास (राणावत)
महाराणा राजसिंह के 8वें पुत्र बहादुरसिंह के वंशज
6) पीपल्या (शक्तावत)
महाराणा उदयसिंह के दूसरे पुत्र महाराज शक्तिसिंह के 13वें पुत्र राजसिंह शक्तावत के दूसरे बेटे कल्याणसिंह के वंशज
7) बेमाली (चुण्डावत)
आमेट के रावत माधवसिंह के तीसरे पुत्र हरिसिंह के वंशज
8) ताणा (झाला)
सादड़ी के स्वामी कीर्तिसिंह के दूसरे पुत्र नाथसिंह के वंशज
9) रामपुरा (राठौड़)
बदनोर के स्वामी जोधसिंह के पुत्र गिरधारी सिंह के वंशज
10) खैराबाद (राणावत) महाराणा उदयसिंह के तीसरे पुत्र वीरमदेव के वंशज
11) महुवा (राणावत)
खैराबाद के स्वामी संग्रामसिंह के तीसरे पुत्र पृथ्वीराज के वंशज
12) लूणदा (चुण्डावत)
सलूम्बर रावत किशनदास चुण्डावत के 10वें पुत्र विट्ठलदास के वंशज
13) थाणा (चुण्डावत)
लूणदा के स्वामी रणछोड़दास के ज्येष्ठ पुत्र अजबसिंह के वंशज
14) जरखाणा/धनेर्या (राणावत)
शिवरती के महाराज अर्जुनसिंह के दूसरे पुत्र बहादुरसिंह के वंशज
15) केलवा (राठौड़)
मारवाड़ के राव सलखा के द्वितीय पुत्र जैतमाल के वंशधर बीदा राठौड़ के वंशज
16) बड़ी रूपाहेली (राठौड़)
बदनोर के वीर योद्धा जयमल राठौड़ के प्रपौत्र श्यामलदास के तीसरे पुत्र साहबसिंह के वंशज
17) भगवानपुरा (चुण्डावत)
देवगढ़ के रावत जसवंतसिंह के तीसरे पुत्र सरूपसिंह के वंशज
18) नेतावल (राणावत)
महाराणा संग्रामसिंह द्वितीय के दूसरे पुत्र बागोर महाराज नाथसिंह के दूसरे बेटे सूरतसिंह के वंशज
19) पीलाधर (राणावत)
महाराणा संग्रामसिंह द्वितीय के पुत्र महाराज नाथसिंह के चौथे पुत्र भगवतसिंह के वंशज
20) निम्बाहेड़ा/लीमाड़ा (राठौड़)
बदनोर के ठाकुर सांवलदास राठौड़ के 5वें पुत्र अमरसिंह के वंशज
21) बाठरड़ा (सारंगदेवोत)
रावत मानसिंह सारंगदेवोत के छठे पुत्र सूरतसिंह के वंशज
22) बंबोरी (पंवार)
अजमेर जिले के श्रीनगर वाले कर्मचंद पंवार के वंशज
23) सनवाड़ (राणावत)
महाराणा उदयसिंह के तीसरे पुत्र वीरमदेव के वंशज | खैराबाद के स्वामी संग्रामसिंह के छोटे पुत्र शंभूसिंह को सनवाड़ की जागीर मिली |
24) करेड़ा (चुण्डावत)
देवगढ़ रावत जसवंतसिंह के पुत्र गोपालदास के वंशज
25) अमरगढ़ (कानावत)
महाराणा उदयसिंह के 5वें पुत्र कान्हसिंह के वंशज
26) लसाणी (चुण्डावत)
आमेट के रावत पत्ता चुण्डावत के चौथे पुत्र शेखा के बेटे दलपतसिंह को महाराणा राजसिंह से यह जागीर मिली |
27) धरियावद (राणावत)
महाराणा प्रताप के तीसरे पुत्र सहसमल के वंशज
28) फलीचड़ा (चौहान)
कोठारिया के रावत रुक्मांगद के पुत्र हरिनाथ के वंशज
29) संग्रामगढ़ (चुण्डावत)
देवगढ़ के रावत संग्रामसिंह के तीसरे पुत्र जयसिंह के वंशज
30) विजयपुर (शक्तावत)
बान्सी के रावत नरहरदास शक्तावत के चौथे पुत्र विजयसिंह के वंशज
(बम्बोरा और रूपनगर 2 ठिकाने बाद में तृतीय श्रेणी में सम्मिलित किए 🙏🙏🙏
जय माताजी🚩🚩🚩
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डोड़िया छपे,दोहे
सुरसति गणपति सकत,उकत दीजिये अपारा !
दाखुं जश डोडिया,मनोहरसिंह मजारा !!
गढ़ लाहो अगजीत,क्रीत दस देस कहाई !
तण जोरावर तठे,दीपे नाहर विरदाई !!
पीढिया सुजल चाधन पखा,नेक विरद खाटन नवा !
दरगाह राण भड़ डोडिया,एक एक वधता हुआ !!२!!
मोटे भाग मन्होरसी,नाहर भीम नरेस!
किधो राज कंवारिये,बानाबंध विसेस !!
भाग बंधे इन्द्रभान् रो,थतियो बनवल थान!
जन्मे पुत सादल जिसों,आहंसी तपवान!!१!!
"धर गुज्जर वालो धणी ,सोलंकी सिधराव !
बणियो बनदो बनथली,कहिया सुजस कहाव !!
देग तेग भड़ डोडिया ,बांका जगत विख्यात !
ए अनमी अपनाविया,राव धणी गुजरात !!२!
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डोड़िया दोहे,छपे
ढ़मके रजवट ढोलडा सुरवीर पदमेश ॥
राज करे दुश्मण डरे नमिया फिरे नरेश ॥॥
मोटे भाग मनोहरसिह नाहर भीम नरेश ॥
किधो राज कवारिये बाना बन्द विशेश ॥॥
भाग बन्धे इन्द्रभाण रो थटीयो बनवल थान॥ जन्मे पुत सादल जिसो आहसी तपवान ॥॥
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"स्वामी भक्त जे सुमट, जान तिन विकास सारे।
कुल डोडा निकलंक, आदि ते अन्त निहारे।। एवं
धवल सल्ह अरू भान मैं साडा भीम समान।
आये षोडस पुरतन, काम शस्र हित रान।।
#डोडीया
#ठाकुर_भीमसींह_डोडीया
#जय_आशापुरा
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फौजा आयी मुगला री , गेरयों गढ़ चहुमेर ।
डोडिया दरबार लड़्या , कियो मुगला सु बैर ।।
मात भौम हित मर मट्या , राखी न मुगला री खेर ।
धिन धिन सांडा सरदार ने , जगदम्ब री हुयी मेर ।।
जगदम्ब री हुयी मेर , जनमियो डोडियो शेर ।
मुग़ल मोकल़ा मारिया , ख्याति भयी चहुमेर ।।
भेजने वाले हनवंत सिंह डोडिया
ठिकाणा नारलाई पाली मारवाड
*चूंडावत भड चार |*
*दोय शक्ता, दो राठौड़,*
*सारंगदेव न पंवार ||"*
मेवाड़ के प्रथम श्रेणी सामंतों के ठिकाने - 16 उमराव
ये ठिकाने हैं ।
1) बड़ी सादड़ी (झाला)
2) देलवाड़ा (झाला)
3) गोगुन्दा (झाला)
4) बेदला (चौहान)
5) पारसोली (चौहान)
6) कोठारिया (चौहन
7) सलूम्बर (चुण्डावत)
8) आमेट (चुण्डावत)
9) देवगढ़ (चुण्डावत)
10) बेगूं (चुण्डावत)
11) भीण्डर (शक्तावत)
12) बान्सी (शक्तावत)
13) बदनोर (राठौड़)
14) घाणेराव (राठौड़)
15) कानोड़ (सारंगदेवोत)
16) बीजोलिया (पंवार)
*अन्य 5 ठिकाने जो बाद में जोड़े गए*
17) भैंसरोड़गढ़ (चुण्डावत)
18) कुराबड़ (चुण्डावत)
19) आसींद (चुण्डावत)
20) मेजा (चुण्डावत)
21) सरदारगढ़ (डोडिया)*मेवाड़ के सामंत*
महाराणा अमरसिंह द्वितीय ने मेवाड़ के सामंतों की 3 श्रेणियां बनाई थीं ।
*प्रथम श्रेणी*
महाराणा अमरसिंह द्वितीय के समय 16 ठिकानों के सामंतों को प्रथम श्रेणी में रखा गया, महाराणा के देहांत के बाद भैंसरोड़, कुराबड़, मेजा, आसींद व सरदारगढ़ ठिकानों के जुड़ने से ये संख्या बढ़कर 21 हो गई थी, लेकिन दरबार में प्रथम श्रेणी में बैठक हमेशा 16 ही रही | मतलब ये कि नए बनाए गए सामंतों को प्रथम श्रेणी में बैठने का अधिकार तभी मिलता जब 16 सामंतों में से कोई अनुपस्थित हो | इन 16 सरदारों को 'उमराव' कहा गया |
*"त्रण झाला त्रण पुरबिया (चौहान),*
*चूंडावत भड चार |*
*दोय शक्ता, दो राठौड़,*
*सारंगदेव न पंवार ||"*
5 नये ठिकाणो के जुड़ने के बाद ये कहा गया
*दो राजा त्रैण राजवी चुण्डा फेरो चार*
*जमादार सुल्तान है डोडीया गढ सरदार*
मेवाड़ के प्रथम श्रेणी सामंतों के ठिकाने - 16 उमराव
ये ठिकाने हैं ।
1) बड़ी सादड़ी (झाला)
काठियावाड़ में हलवद के राजसिंह जी के पुत्र अज्जा के वंशज | अज्जा झाला को यह जागीर महाराणा रायमल ने दी |
2) देलवाड़ा (झाला)
काठियावाड़ में हलवद के राजसिंह जी के पुत्र सज्जा के वंशज | सज्जा झाला को यह जागीर महाराणा रायमल ने दी |
3) गोगुन्दा (झाला)
यह जागीर महाराणा अमरसिंह प्रथम ने शत्रुसाल झाला के छोटे पुत्र कान्हसिंह को दी थी ।
4) बेदला (चौहान)
सम्राट पृथ्वीराज चौहान के वंशधर चंद्रभान चौहान के वंशज
5) पारसोली (चौहान)
बेदला के स्वामी रामचंद्र चौहान के छोटे पुत्र केसरीसिंह के वंशज | केसरीसिंह को यह जागीर महाराणा राजसिंह से मिली |
6) कोठारिया (चौहान)
रणथम्भौर के अंतिम चौहान राजा हम्मीर के वंशधर माणिकचंद चौहान के वंशज
7) सलूम्बर (चुण्डावत)
महाराणा लाखा के ज्येष्ठ पुत्र रावत चुण्डा के वंशज
8) आमेट (चुण्डावत)
रावत चुण्डा के प्रपौत्र जग्गा चुण्डावत के वंशज।
9) देवगढ़ (चुण्डावत)
रावत चुण्डा के प्रपौत्र सांगा चुण्डावत के वंशज।
10) बेगूं (चुण्डावत)
सलूम्बर रावत साईंदास चुण्डावत के भाई खेंगार के पुत्र गोविंददास के वंशज।
11) भीण्डर (शक्तावत)
महाराणा उदयसिंह के दूसरे पुत्र महाराज शक्तिसिंह के ज्येष्ठ पुत्र भाण को यह जागीर महाराणा प्रताप से मिली |
12) बान्सी (शक्तावत)
महाराज शक्तिसिंह के पुत्र रावत अचलदास के वंशज | रावत अचलदास को यह जागीर महाराणा प्रताप से मिली |
13) बदनोर (राठौड़)
मेड़ता के वीर योद्धा जयमल राठौड़ के वंशज | जयमल राठौड़ को यह जागीर महाराणा उदयसिंह से मिली |
14) घाणेराव (राठौड़)
मेड़ता के राव वीरमदेव के पुत्र व जयमल राठौड़ के भाई ठाकुर प्रताप सिंह के वंशज
15) कानोड़ (सारंगदेवोत)
महाराणा लाखा के पुत्र अज्जा के बेटे सारंगदेव के वंशज | सारंगदेव को यह जागीर महाराणा रायमल ने दी |
16) बीजोलिया (पंवार)
मालवा के परमार वंश से निकले हुए अशोक पंवार के वंशज
*अन्य 5 ठिकाने जो बाद में जोड़े गए*
17) भैंसरोड़गढ़ (चुण्डावत)
सलूम्बर के रावत केसरीसिंह चुण्डावत प्रथम के वंशज
18) कुराबड़ (चुण्डावत)
सलूम्बर के रावत केसरीसिंह चुण्डावत प्रथम के तीसरे पुत्र अर्जुनसिंह के वंशज
19) आसींद (चुण्डावत)
कुराबड़ के रावत अर्जुनसिंह के चौथे पुत्र ठाकुर अजीतसिंह के वंशज
20) मेजा (चुण्डावत)
आमेट के रावत माधवसिंह के चौथे पुत्र हरिसिंह के छठे वंशधर बेमाली वाले जालिमसिंह के वंशज
21) सरदारगढ़ (डोडिया)
काठियावाड़ में स्थित शार्दूलगढ़ के सिंह डोडिया के पुत्र धवल के वंशज
*द्वितीय श्रेणी के मेवाड़ 32 ठिकाणे*
1) हमीरगढ़ (राणावत)
महाराणा उदयसिंह के पुत्र वीरमदेव के वंशज
2) चावण्ड (चुण्डावत)
सलूम्बर के रावत कुबेरसिंह चुण्डावत के 5वें पुत्र अभयसिंह के वंशज।
3) भदेसर (चुण्डावत)
सलूम्बर के रावत भीमसिंह चुण्डावत के दूसरे पुत्र भैरवसिंह के वंशज
4) बोहेड़ा (शक्तावत)
भीण्डर के महाराज मोहकम सिंह द्वितीय के दूसरे पुत्र फतहसिंह के वंशज
5) भूंणास (राणावत)
महाराणा राजसिंह के 8वें पुत्र बहादुरसिंह के वंशज
6) पीपल्या (शक्तावत)
महाराणा उदयसिंह के दूसरे पुत्र महाराज शक्तिसिंह के 13वें पुत्र राजसिंह शक्तावत के दूसरे बेटे कल्याणसिंह के वंशज
7) बेमाली (चुण्डावत)
आमेट के रावत माधवसिंह के तीसरे पुत्र हरिसिंह के वंशज
8) ताणा (झाला)
सादड़ी के स्वामी कीर्तिसिंह के दूसरे पुत्र नाथसिंह के वंशज
9) रामपुरा (राठौड़)
बदनोर के स्वामी जोधसिंह के पुत्र गिरधारी सिंह के वंशज
10) खैराबाद (राणावत) महाराणा उदयसिंह के तीसरे पुत्र वीरमदेव के वंशज
11) महुवा (राणावत)
खैराबाद के स्वामी संग्रामसिंह के तीसरे पुत्र पृथ्वीराज के वंशज
12) लूणदा (चुण्डावत)
सलूम्बर रावत किशनदास चुण्डावत के 10वें पुत्र विट्ठलदास के वंशज
13) थाणा (चुण्डावत)
लूणदा के स्वामी रणछोड़दास के ज्येष्ठ पुत्र अजबसिंह के वंशज
14) जरखाणा/धनेर्या (राणावत)
शिवरती के महाराज अर्जुनसिंह के दूसरे पुत्र बहादुरसिंह के वंशज
15) केलवा (राठौड़)
मारवाड़ के राव सलखा के द्वितीय पुत्र जैतमाल के वंशधर बीदा राठौड़ के वंशज
16) बड़ी रूपाहेली (राठौड़)
बदनोर के वीर योद्धा जयमल राठौड़ के प्रपौत्र श्यामलदास के तीसरे पुत्र साहबसिंह के वंशज
17) भगवानपुरा (चुण्डावत)
देवगढ़ के रावत जसवंतसिंह के तीसरे पुत्र सरूपसिंह के वंशज
18) नेतावल (राणावत)
महाराणा संग्रामसिंह द्वितीय के दूसरे पुत्र बागोर महाराज नाथसिंह के दूसरे बेटे सूरतसिंह के वंशज
19) पीलाधर (राणावत)
महाराणा संग्रामसिंह द्वितीय के पुत्र महाराज नाथसिंह के चौथे पुत्र भगवतसिंह के वंशज
20) निम्बाहेड़ा/लीमाड़ा (राठौड़)
बदनोर के ठाकुर सांवलदास राठौड़ के 5वें पुत्र अमरसिंह के वंशज
21) बाठरड़ा (सारंगदेवोत)
रावत मानसिंह सारंगदेवोत के छठे पुत्र सूरतसिंह के वंशज
22) बंबोरी (पंवार)
अजमेर जिले के श्रीनगर वाले कर्मचंद पंवार के वंशज
23) सनवाड़ (राणावत)
महाराणा उदयसिंह के तीसरे पुत्र वीरमदेव के वंशज | खैराबाद के स्वामी संग्रामसिंह के छोटे पुत्र शंभूसिंह को सनवाड़ की जागीर मिली |
24) करेड़ा (चुण्डावत)
देवगढ़ रावत जसवंतसिंह के पुत्र गोपालदास के वंशज
25) अमरगढ़ (कानावत)
महाराणा उदयसिंह के 5वें पुत्र कान्हसिंह के वंशज
26) लसाणी (चुण्डावत)
आमेट के रावत पत्ता चुण्डावत के चौथे पुत्र शेखा के बेटे दलपतसिंह को महाराणा राजसिंह से यह जागीर मिली |
27) धरियावद (राणावत)
महाराणा प्रताप के तीसरे पुत्र सहसमल के वंशज
28) फलीचड़ा (चौहान)
कोठारिया के रावत रुक्मांगद के पुत्र हरिनाथ के वंशज
29) संग्रामगढ़ (चुण्डावत)
देवगढ़ के रावत संग्रामसिंह के तीसरे पुत्र जयसिंह के वंशज
30) विजयपुर (शक्तावत)
बान्सी के रावत नरहरदास शक्तावत के चौथे पुत्र विजयसिंह के वंशज
(बम्बोरा और रूपनगर 2 ठिकाने बाद में तृतीय श्रेणी में सम्मिलित किए 🙏🙏🙏
जय माताजी🚩🚩🚩
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डोड़िया छपे,दोहे
सुरसति गणपति सकत,उकत दीजिये अपारा !
दाखुं जश डोडिया,मनोहरसिंह मजारा !!
गढ़ लाहो अगजीत,क्रीत दस देस कहाई !
तण जोरावर तठे,दीपे नाहर विरदाई !!
पीढिया सुजल चाधन पखा,नेक विरद खाटन नवा !
दरगाह राण भड़ डोडिया,एक एक वधता हुआ !!२!!
मोटे भाग मन्होरसी,नाहर भीम नरेस!
किधो राज कंवारिये,बानाबंध विसेस !!
भाग बंधे इन्द्रभान् रो,थतियो बनवल थान!
जन्मे पुत सादल जिसों,आहंसी तपवान!!१!!
"धर गुज्जर वालो धणी ,सोलंकी सिधराव !
बणियो बनदो बनथली,कहिया सुजस कहाव !!
देग तेग भड़ डोडिया ,बांका जगत विख्यात !
ए अनमी अपनाविया,राव धणी गुजरात !!२!
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डोड़िया दोहे,छपे
ढ़मके रजवट ढोलडा सुरवीर पदमेश ॥
राज करे दुश्मण डरे नमिया फिरे नरेश ॥॥
मोटे भाग मनोहरसिह नाहर भीम नरेश ॥
किधो राज कवारिये बाना बन्द विशेश ॥॥
भाग बन्धे इन्द्रभाण रो थटीयो बनवल थान॥ जन्मे पुत सादल जिसो आहसी तपवान ॥॥
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"स्वामी भक्त जे सुमट, जान तिन विकास सारे।
कुल डोडा निकलंक, आदि ते अन्त निहारे।। एवं
धवल सल्ह अरू भान मैं साडा भीम समान।
आये षोडस पुरतन, काम शस्र हित रान।।
#डोडीया
#ठाकुर_भीमसींह_डोडीया
#जय_आशापुरा
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फौजा आयी मुगला री , गेरयों गढ़ चहुमेर ।
डोडिया दरबार लड़्या , कियो मुगला सु बैर ।।
मात भौम हित मर मट्या , राखी न मुगला री खेर ।
धिन धिन सांडा सरदार ने , जगदम्ब री हुयी मेर ।।
जगदम्ब री हुयी मेर , जनमियो डोडियो शेर ।
मुग़ल मोकल़ा मारिया , ख्याति भयी चहुमेर ।।



































जय मां चामुंडा
जवाब देंहटाएंजय माता की हुकुम हमने आपके द्वारा डोडिया राजपूतों का इतिहास के बारे में अकल्पनीय अद्भुत एवं विश्वसनीय इतिहास आपके द्वारा जो इस आधुनिक यंत्रों पर प्रकाशित किया गया है उसके लिए मैं आपका हृदय से आभार करता हूं हुकुम डोडिया राजपूतों में आशावद डोडिया भी आते हैं जिन का ठिकाना बनवाड़ा में है और बनवाड़ा मौकडि के पास है जहां हमारी कुलदेवी मां चामुंडा की राजनीति है आपसे निवेदन है कि अपने इतिहास में आशावाद डोडिया का इतिहास निकालें जय माता की
जवाब देंहटाएंजय माता जी हुक्म मो,9950555091
हटाएंजशवन्त सिंह डोडिया ठिकाणा-सरदारगढ
जय माता की हुकुम हम ने आपके द्वारा डोडिया राजपूतों के बारे में इतिहास के बारे में विश्वसनीय इतिहास आपने डोडिया राजपूतों का बताया है उसके लिए मैं आपका हृदय से आभार प्रकट करता हूं हुकुम आशावाद डोडिया का ठिकाना बनवाड़ा है और यह मोकड़ी के पास है जहां हमारी कुलदेवी मां चामुंडा वीरा जाती है
जवाब देंहटाएंहुक्म आपका बहुत-बहुत धन्यवाद
हटाएंजो आपको यह जानकारी पसन्द आई ओर
अपने बारे मे जानने की इच्छा जाहिर की
बहुत अच्छा लगा ।
आपका पुरा परिचय वहाटसप पर करना चाहुंगा
आप मुझे वहाटसप पर मेसेज कर सकते है किसी भी सवाल के लिए या कोल कर सकते है ।
jay mata ji ki please add this Dodiya Rajput group
जवाब देंहटाएंKu.Rajendra Singh Dodiya mp ujjain
my whatsap number
हटाएं7697728828
जय माता दी नरेंद्र सिंह डोडीया ठिकाना.राणापुर.जिला झाबुआ 7771983707 group me ad kr dena 🙏🏻🚩
हटाएंJay mataji🙏 .. Pruthviraj Dodiya :8866114282 plz add this num to group .
जवाब देंहटाएं2 gaw dodiya ke malwa madya pradesh me bhi hai 1=bhanoli 2=jiwajipura for more information CNO 6264848855
जवाब देंहटाएं6264993209
जवाब देंहटाएंGopal Singh dodiya thi.chandavta plz aad me
Bhupendra Singh Dodiya
जवाब देंहटाएंThi. Kathbadoda ujjain (mp)
PLZZ aad me group me
Jay mataji.
जवाब देंहटाएंJayendrasinh Dodiya
Surendranagar.
Gujarat.
झालोड़ा जोधपुर
जवाब देंहटाएंजोधपुर महाराजा विजय सिंह जी ने सरदारगढ़ की राजकुमारी से विवाह किया तब यहां से बाईसा के साथ इनके भतीजे गए जिनको जोधपुर दरबार ने झालोड़ा ठिकाना दिया था।
जय माता दी हुकम समरथ सिंह डोडिया ठिकाना ऊणी जिला रतलाम मो 9165463202 ग्रुप में add कर देवा
जवाब देंहटाएंJay Mataji..Khamma ghani
जवाब देंहटाएंDigvijasinh Narpatsinhji Dodiya ..Rewa Kantha state Vajiriya
Rajpipala ( Gujarat)..Add me